अगर आपके परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या किसी करीबी रिश्तेदार को हार्ट अटैक हुआ है, तो अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने से आपका जोखिम बढ़ सकता है, खासकर जब किसी करीबी रिश्तेदार को कम उम्र में हार्ट अटैक आया हो। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आपको भी हार्ट अटैक जरूर होगा। सही समय पर जाँच, स्वस्थ जीवनशैली और जोखिम कारकों पर नियंत्रण से हृदय रोग की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है।
अपनी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और पारिवारिक इतिहास के आधार पर Heart specialist in jaipur से परामर्श लेकर यह समझ सकते हैं कि आपको कौन-सी जाँच करवानी चाहिए।
परिवार में हार्ट अटैक होने से जोखिम क्यों बढ़ता है?
हार्ट अटैक तब होता है, जब हृदय की मांसपेशियों तक खून पहुँचाने वाली कोरोनरी धमनी में रक्त का प्रवाह कम या बंद हो जाता है। इसका एक सामान्य कारण धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट जमा होना है, जिससे रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
परिवार में हृदय रोग होने पर आनुवंशिक कारणों से हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है। परिवार की खानपान और जीवनशैली से जुड़ी समान आदतें भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।
यदि पिता या भाई को 55 वर्ष की उम्र से पहले, या माता या बहन को 65 वर्ष की उम्र से पहले हृदय रोग हुआ हो, तो इसे समय से पहले होने वाला हृदय रोग माना जा सकता है। ऐसी जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।
जाँच कब करवानी चाहिए?
यदि परिवार में किसी को हार्ट अटैक हुआ है, तो जाँच करवाने का सही समय आपकी उम्र, रिश्तेदार की उम्र और आपके अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करता है।
- कम उम्र में हार्ट अटैक का पारिवारिक इतिहास: डॉक्टर से अपने हृदय रोग के जोखिम का आकलन करवाएँ।
- हाई ब्लड प्रेशर: नियमित रूप से ब्लड प्रेशर जाँचें और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
- डायबिटीज: ब्लड शुगर नियंत्रित रखें और जरूरत के अनुसार जाँच करवाएँ।
- हाई कोलेस्ट्रॉल: लिपिड प्रोफाइल टेस्ट के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
- धूम्रपान या मोटापा: इनसे हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है, इसलिए समय पर जीवनशैली में बदलाव करें।
लक्षण न होने पर हर व्यक्ति को ECG, TMT या एंजियोग्राफी करवाने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर पहले आपके स्वास्थ्य और जोखिम कारकों का मूल्यांकन करते हैं।
हार्ट अटैक के जोखिम का पता लगाने के लिए कौन-सी जाँच होती हैं?
1. ब्लड प्रेशर की जाँच
हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना लक्षणों के रहता है। लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहने से हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। नियमित जाँच से इसका पता लगाने और इसे नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
2. लिपिड प्रोफाइल टेस्ट
इस ब्लड टेस्ट से कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा का पता चलता है। LDL को खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, क्योंकि इसकी अधिक मात्रा धमनियों में फैट जमा होने में योगदान दे सकती है।
यदि परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या बहुत अधिक कोलेस्ट्रॉल का इतिहास है, तो डॉक्टर यह जाँच करवाने की सलाह दे सकते हैं।
3. ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट
डायबिटीज हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाती है। ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट से खून में शुगर के स्तर का आकलन किया जाता है। डॉक्टर आपकी उम्र, वजन और अन्य जोखिमों के अनुसार इन जाँचों की सलाह दे सकते हैं।
4. ECG यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम
ECG हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। इससे हृदय की धड़कन में गड़बड़ी और कुछ हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सामान्य ECG यह गारंटी नहीं देता कि भविष्य में हार्ट अटैक का खतरा नहीं है। बिना लक्षण वाले हर व्यक्ति को यह टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं होती।
5. TMT और अन्य जाँच
TMT में ट्रेडमिल पर चलने या व्यायाम के दौरान हृदय की प्रतिक्रिया देखी जाती है। इकोकार्डियोग्राफी से हृदय की बनावट और पंप करने की क्षमता का आकलन किया जाता है। कुछ लोगों में CT कोरोनरी कैल्शियम स्कोर हृदय रोग के जोखिम को समझने में मदद कर सकता है।
इन जाँचों की जरूरत हर व्यक्ति को नहीं होती। डॉक्टर आपके लक्षणों और जोखिम के आधार पर सही टेस्ट चुनते हैं।
हार्ट अटैक का खतरा कम करने के लिए क्या करें?
परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर भी आप अपनी सेहत के लिए कई जरूरी कदम उठा सकते हैं।
- संतुलित भोजन करें और फल, सब्जियाँ तथा साबुत अनाज खाएँ।
- नमक, ट्रांस फैट और अधिक संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
- धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें।
- ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें।
- पर्याप्त नींद लें और तनाव को संभालने के स्वस्थ तरीके अपनाएँ।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएँ शुरू या बंद न करें।
यदि परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक हुआ है, तो डॉक्टर को रिश्तेदार की उम्र और बीमारी के बारे में स्पष्ट जानकारी दें। इससे आपके जोखिम का बेहतर आकलन करने में मदद मिल सकती है।
हार्ट अटैक के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
सीने में दबाव, जकड़न या दर्द, साँस फूलना, ठंडा पसीना, मतली या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन अथवा जबड़े तक फैलना हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों में लक्षण हल्के या असामान्य भी हो सकते हैं।
यदि ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें, तो नियमित जाँच के लिए अपॉइंटमेंट लेने का इंतजार न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
ManglamPlus Medicity में हृदय स्वास्थ्य की देखभाल
परिवार में हार्ट अटैक का इतिहास होने पर समय रहते अपने हृदय स्वास्थ्य का आकलन करवाना समझदारी है। ManglamPlus Medicity में अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श लेकर जरूरी जाँच और उपचार के विकल्पों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
हर व्यक्ति की जरूरत अलग होती है। इसलिए जाँच का चुनाव उम्र, पारिवारिक इतिहास, लक्षणों और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर होना चाहिए।
निष्कर्ष
परिवार में किसी को हार्ट अटैक होने पर घबराने के बजाय अपने जोखिम को समझना और समय पर जाँच करवाना जरूरी है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जाँच हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने में मदद कर सकती हैं। ECG, TMT और अन्य जाँच केवल जरूरत के अनुसार करवानी चाहिए।
यदि आपके परिवार में कम उम्र में हृदय रोग हुआ है या आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर अथवा हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो Heart specialist in jaipur से परामर्श लेकर अपनी व्यक्तिगत जाँच और बचाव की योजना बनाएँ।





